जॉन रॉल्स का न्याय का सिद्धांत

समकालीन उदारवादी चिन्तक जॉन रॉल्स ने अपनी कृति ‘ए थ्योरी ऑफ जस्टिस’ (1971) में न्याय का सिद्धांत प्रस्तुत किया। इस समय अमेरिका में श्वेतों और अश्वेतों के मध्य संघर्ष चल रहा था। जॉन रॉल्स ने इस संघर्ष के समाधान के लिए न्याय का सिद्धांत प्रस्तुत किया।

रॉल्स ने न्याय का सिद्धांत प्रस्तुत करते समय एक ओर काण्ट से विवेकवाद को लिया कि व्यक्ति अपने आप में साध्य है, तो दूसरी ओर लॉक से प्राकृतिक अवस्था और समझौते की प्रक्रिया को लिया। रॉल्स के अनुसार, न्याय की समस्या प्राथमिक वस्तुओं के न्यायपूर्ण वितरण की समस्या है। ये प्राथमिक वस्तुएँ हैं-अधिकार और स्वतंत्रताएं, शक्तियाँ, अवसर, आय और सम्पदा तथा आत्मसम्मान। न्याय की सर्वसम्मत प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए रॉल्स एक विशेष तर्क प्रणाली का सहारा लेता है।

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इसके अन्तर्गत रॉल्स कल्पना करता है कि यदि व्यक्तियों को उनकी वर्तमान सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों से परे हटा दिया जाए और उन्हें समाज में प्रचलित भेदभाव के ज्ञान से दूर कर दिया जाए, परन्तु उन्हें विवेक लाभ-हानि का छोटा-मोटा ज्ञान अवश्य हो।
ऐसी स्थिति को रॉल्स प्राकृतिक अवस्था के स्थान पर मूल स्थिति (Original Position) की संज्ञा देता है। चूँकि इसमें भेदभाव का ज्ञान निपुणताओं, योग्यताओं से परे है अर्थात् रॉल्स के शब्दों में ज्ञान वह है, जो अज्ञानता के पर्दे (Veil of Ignorance) के पीछे बैठा है। जॉन रॉल्स के शब्दों में लोग परस्पर सहमति से जो नियम स्वीकार करेंगे, उन्हें विश्वव्यापी आधार पर न्याय के नियम मान सकते हैं।

अज्ञान के पर्दे के पीछे मनुष्यों पर कुछ प्रतिबन्ध अवश्य लगे होते हैं, जो नैतिकता के विचार के साथ जुड़े हैं, परन्तु उन्हें उन बातों की जानकारी नहीं होती जो उनके मन में परस्पर विरोध या पूर्वाग्रह (Prejudice) पैदा कर सकती हैं। रॉल्स ने मूल स्थिति में जिन मनुष्यों की कल्पना की है वे विवेकशीलकर्ता हैं, जो न्याय के नियमों का पता लगाने के उद्देश्य से परस्पर सहमति हेतु एकत्रित हुए हैं, वे अहमवादी ईर्ष्यालु नहीं है, वरन् उनकी स्वार्थ भावना पर नैतिकता का अंकुश रहता है।
रॉल्स के अनुसार, ऐसी स्थिति में मनुष्य न्यूनतम जोखिम उठाने वाले नियम पर सहमति करेंगे अर्थात् हीनतम स्थिति में उसके लिए अधिकतम लाभ जैसे न्याय के नियम बनाएँगे।
रॉल्स के अनुसार ये नियम इस प्रकार होंगे–

1. समान स्वतंत्रता का सिद्धान्त:
सबको समान स्वतन्त्रता, जिसमें रॉल्स नागरिक और राजनीतिक स्वतन्त्रता को सम्मिलित करता है।

2. सामाजिक आर्थिक नियम:
– अवसर की उचित समानता: सबको ऊंचा उठाने के समान अवसर प्रदान होंगे।

– तर्कसंगत भेदभाव: हीनतम स्थिति वाले लोगों को अधिकतम लाभ मिलेगा। इसे रॉल्स क्षतिपूर्ति का नियम कहते हैं। रॉल्स न्याय के सिद्धान्त को न्याय के उचित क्षेत्र की संज्ञा देता है।

जॉन रॉल्स के उपर्युक्त न्याय सिद्धान्त की प्रमुख विशेषता यह है कि रॉल्स न्याय को समाज का प्रथम सद्गुण मानता है। रॉल्स न्याय एवं प्रगति में न्याय का पक्ष लेता है। वस्तुतः रॉल्स का न्याय का सिद्धान्त सामाजिक न्याय से सम्बन्धित है। रॉल्स के न्याय सिद्धान्त में गरीबों, वंचित वर्गों के लोगों के लिए अर्थात् हीनतम स्थिति वाले लोगों के लिए सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था करता है। इसी कारण रॉल्स के न्याय सिद्धान्त को क्षतिपूर्ति का सिद्धान्त भी कहते हैं।

रॉल्स के शब्दों में, कोई भी जंजीर अपनी सबसे कमजोर कड़ी से मजबूत नहीं होती। इसी कारण रॉल्स उपयोगिता के सिद्धान्त का खण्डन करता है। रॉल्स के अनुसार, सुखी लोगों का सुख कितना ही क्यों न बढ़ा दिया जाए, उससे दुःखी लोगों के दुःख की बराबरी नहीं की जा सकती। रॉल्स के न्याय सिद्धान्त की दूसरी विशेषता ये है कि रॉल्स अपने सिद्धान्त को शुद्ध प्रक्रियात्मक सिद्धान्त बताता है।

रॉल्स के अनुसार, चूँकि न्याय सिद्धान्त शुद्ध प्रक्रिया पर आधारित है, न कि पर्यावरण और मानक पर। इसलिए यह शुद्ध प्रक्रियात्मक सिद्धान्त है। इस प्रकार रॉल्स शुद्ध प्रक्रियात्मक न्याय के माध्यम से बाजार व्यवस्था को बनाए रखता है। साथ में हस्तांतरण शाखा के माध्यम से बाजार व्यवस्था में गरीबों के हितों की भी रक्षा करता है।

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